सूरज ढला तो कद से ऊँचे हो गए साये,

Sunday, 21 December 2014

अभी जिँदगी का रुख बहुत खिलाफ है मेरे..... दिया जिधर भी जलाऊं, हवा उधर से चलने लगती है. .

http://bansilal.tumblr.com/post/105781285933
Posted by Bansi Lal at 08:06 No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest
Newer Posts Older Posts Home
Subscribe to: Comments (Atom)

About Me

My photo
Bansi Lal
गलत लोग सभी के जीवन में आते हैं लेकिन सीख हमेशा सही देकर जाते है.. नजा़कत तो देखिये, कि सूखे पत्ते ने डाली से कहा... चुपके से अलग करना वरना लोगो का रिश्तों से भरोसा उठ जायेगा.. अपना वही है, जो खामोशी को पढ़ सके...!! वरना अंदाज़े तो बेगाने भी लगा लेते है...!!
View my complete profile

Blog Archive

  • ▼  2014 (2)
    • ▼  December (1)
      • अभी जिँदगी का रुख बहुत खिलाफ है मेरे..... दिया ज...
    • ►  June (1)
Picture Window theme. Powered by Blogger.